अमरनाथ का शिवलिंग पूरी तरह पिघला, श्रद्धालुओं में चिंता; अब केवल पवित्र गुफा के हो रहे दर्शन

Amarnath Yatra News: अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी और 4 जुलाई से श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन शुरू किए थे। लेकिन यात्रा शुरू होने के महज 5–6 दिनों के भीतर ही प्राकृतिक हिम शिवलिंग पूरी तरह पिघल गया है। कुछ श्रद्धालुओं का दावा है कि शिवलिंग का एक छोटा हिस्सा अभी भी दिखाई दे रहा है, जबकि कई भक्तों का कहना है कि उन्हें केवल पवित्र गुफा के ही दर्शन हुए। जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी पुष्टि की है कि जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) के कारण शिवलिंग समय से पहले पिघल गया है।

यात्रा शुरू होते ही छोटा था शिवलिंग

यात्रा के आरंभ में ही शिवलिंग का आकार सामान्य से छोटा होने की चर्चा थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि बाबा बर्फानी एक सप्ताह के भीतर ही लगभग पूरी तरह पिघल जाएंगे। यात्रा के चार दिन बाद ही शिवलिंग का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा पिघल चुका था और अब स्थिति यह है कि गुफा में शिवलिंग का केवल मामूली अंश ही दिखाई देता है। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा कुल 57 दिनों तक चलेगी।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या भी बनी चिंता

पहले अमरनाथ गुफा तक पहुंचना बेहद कठिन था, इसलिए सीमित संख्या में श्रद्धालु ही दर्शन कर पाते थे। लेकिन अब सड़क और परिवहन सुविधाएं बेहतर होने के कारण हर दिन हजारों श्रद्धालु गुफा तक पहुंच रहे हैं। इस वर्ष यात्रा शुरू होने के केवल चार दिनों में ही 93 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिदिन 25 से 30 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सुझाव दिया था कि प्रतिदिन 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

जलवायु परिवर्तन को बताया गया बड़ा कारण

जम्मू-कश्मीर सरकार का कहना है कि क्लाइमेट चेंज, बढ़ते तापमान और गुफा के आसपास मानवीय गतिविधियों में वृद्धि के कारण प्राकृतिक हिम शिवलिंग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस वर्ष क्षेत्र में सामान्य वर्षों की तुलना में काफी कम ठंड पड़ी है। जहां आमतौर पर इस मौसम में पहलगाम और आसपास के इलाकों में गर्म कपड़े पहनने पड़ते हैं, वहीं इस बार मौसम अपेक्षाकृत गर्म बना हुआ है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कहा कि शिवलिंग का इतनी जल्दी पिघल जाना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह प्रकृति और भगवान की इच्छा पर निर्भर करता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन आज एक गंभीर और वास्तविक चुनौती बन चुका है।

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