
US Senate Bill on Russian Oil: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने एक और बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट में एक ऐसे विधेयक (बिल) को व्यापक समर्थन मिला है, जिसमें रूस से कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का प्रावधान किया गया है।
इस बिल को 60 से अधिक अमेरिकी सीनेटरों का समर्थन मिल चुका है, जिससे इसके जल्द कानून बनने की संभावना बढ़ गई है। यदि यह कानून लागू होता है, तो भारत और चीन जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
रूस से तेल खरीदने वाले शीर्ष देशों पर होगी कार्रवाई
बिल के सेक्शन 113 के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार होगा कि वे उन देशों से आने वाले आयात पर 100% तक टैरिफ लगा सकें, जो पिछले 12 महीनों में रूस से तेल या गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों में शामिल रहे हों।
इसके अलावा, रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर भी यही कार्रवाई की जा सकेगी। माना जा रहा है कि इस प्रावधान का सबसे अधिक प्रभाव भारत और चीन पर पड़ सकता है।
विधेयक में रूस से सीधे आयात होने वाले उत्पादों पर 500% तक टैरिफ लगाने का भी प्रावधान रखा गया है।
अमेरिका और यूरोप के लिए विशेष छूट
इस विधेयक में कुछ महत्वपूर्ण अपवाद भी शामिल किए गए हैं।
- रूसी यूरेनियम पर छूट: अमेरिका अपनी परमाणु ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए रूस से कम संवर्धित (Low-Enriched) यूरेनियम आयात करता है। इसलिए सेक्शन 114(e) के तहत इस आयात को प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है।
- यूरोपीय देशों को राहत: सेक्शन 113(d) के तहत उन 15 यूरोपीय देशों को गैस आयात पर छूट दी गई है, जो अपनी कुल गैस आवश्यकता का 15% से कम हिस्सा रूस से खरीदते हैं और रूस पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
हालांकि यह राहत केवल प्राकृतिक गैस पर लागू होगी, कच्चे तेल पर नहीं।
बिल पर दोहरे मापदंड के आरोप
आलोचकों का कहना है कि अमेरिका एक ओर अन्य देशों पर रूस से ऊर्जा खरीदने को लेकर दबाव बना रहा है, जबकि अपनी जरूरतों के लिए रूसी यूरेनियम आयात जारी रखे हुए है। इसी कारण इस विधेयक को अमेरिका की ‘दोहरी नीति’ का उदाहरण बताया जा रहा है।
सीनेटर लिंडसे ग्राहम की पहल
इस विधेयक का मसौदा तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इसे तैयार करने में लगभग दो वर्षों तक काम किया था। उनके प्रयासों के बाद यह प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में मजबूत समर्थन हासिल करने में सफल रहा और अब इसे व्हाइट हाउस का भी समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्रपति को मिलेगी विशेष छूट देने की शक्ति
प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी होगा कि वे कांग्रेस को सूचित कर किसी देश को इन प्रतिबंधों या टैरिफ से अस्थायी या विशेष छूट दे सकें। हालांकि, ऐसी छूट के खिलाफ अमेरिकी कांग्रेस को 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार होगा।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि यह कानून लागू होता है और भारत रूस से तेल खरीदने वाले शीर्ष देशों में बना रहता है, तो अमेरिका भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर भारी टैरिफ लगा सकता है। इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों और भारतीय निर्यात पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय कानून के पारित होने और अमेरिकी प्रशासन द्वारा उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
