
Middle East Crisis: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अब पश्चिम एशिया का एक और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग संकट के केंद्र में आ गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात बाधित करने की धमकी दी है। यदि यह मार्ग प्रभावित होता है, तो एशिया और यूरोप के बीच व्यापार, कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
बाब-अल-मंदेब क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
बाब-अल-मंदेब लाल सागर (Red Sea) को अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) से जोड़ने वाला एक रणनीतिक समुद्री मार्ग है। इसी रास्ते से जहाज स्वेज नहर तक पहुंचते हैं।
वैश्विक स्तर पर समुद्री व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत और दुनिया के कच्चे तेल का लगभग 12 प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुजरता है। प्रतिदिन लगभग 85 लाख बैरल तेल और गैस की आपूर्ति इसी जलमार्ग से होती है।
मार्ग बंद हुआ तो बढ़ेगी वैश्विक महंगाई
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद हो जाता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता अपनाना पड़ेगा।
- यात्रा लगभग 9,000 किलोमीटर लंबी हो जाएगी।
- माल पहुंचने में 10 से 14 दिन अतिरिक्त लग सकते हैं।
- शिपिंग लागत, बीमा और ईंधन खर्च में भारी वृद्धि होगी।
- कच्चे तेल, गैस और अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
हूती विद्रोहियों की धमकी से बढ़ी चिंता
हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रही, तो वे सऊदी अरब के तेल निर्यात को निशाना बनाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की बाब-अल-मंदेब से कोई सीमा नहीं लगती, लेकिन वह हूती विद्रोहियों के माध्यम से इस क्षेत्र में प्रभाव डाल सकता है। इस कारण इस जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
सऊदी अरब के तेल निर्यात पर पड़ सकता है असर
सऊदी अरब अपने पश्चिमी तट स्थित यानबू बंदरगाह के माध्यम से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बाद सऊदी अरब ने इसी मार्ग का उपयोग बढ़ाया था।
यदि बाब-अल-मंदेब भी बाधित होता है, तो सऊदी अरब के तेल निर्यात पर भी बड़ा असर पड़ सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति संकट गहरा सकता है।
भारत समेत एशियाई देशों पर भी असर संभव
भारत, चीन, जापान और यूरोप के बीच होने वाला बड़ा समुद्री व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है। इसके अलावा एशिया से यूरोप भेजे जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स, खाद्यान्न और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति भी इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह जलमार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होगी और कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है।
क्या है ‘गेट ऑफ टीयर्स’?
बाब-अल-मंदेब को “गेट ऑफ टीयर्स” (Gate of Tears) भी कहा जाता है। यह जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है तथा विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। इतिहास में यहां कई जहाज दुर्घटनाओं और कठिन समुद्री परिस्थितियों के कारण इसे यह नाम दिया गया।
