
Gujarat Fireworks Industry: अहमदाबाद के वस्त्राल में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट के बाद गुजरात के तेजी से बढ़ते पटाखा उद्योग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य में हर साल करीब 150 करोड़ रुपये के पटाखों का उत्पादन होता है और इस उद्योग से 10,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। इसके बावजूद अवैध इकाइयों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण लगातार हादसे सामने आ रहे हैं।
गुजरात में 500 करोड़ रुपये का पटाखा बाजार
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, गुजरात में पटाखों का वार्षिक कारोबार लगभग 500 करोड़ रुपये का है। इसमें से करीब 30 प्रतिशत यानी लगभग 150 करोड़ रुपये के पटाखों का उत्पादन राज्य में ही होता है, जबकि शेष मांग मुख्य रूप से तमिलनाडु के शिवकाशी से पूरी की जाती है।
बताया जाता है कि अहमदाबाद, डीसा और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 300 छोटी-बड़ी उत्पादन इकाइयां संचालित हैं। इनमें लाइसेंस प्राप्त और अवैध दोनों प्रकार की इकाइयां शामिल होने का दावा किया जाता है।
10 हजार से अधिक लोगों की आजीविका जुड़ी
पटाखा उद्योग से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री सहित पूरे क्षेत्र में 10 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। इनमें अधिकांश श्रमिक आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं।
गणेशोत्सव से शुरू होता है उत्पादन सीजन
व्यापारियों के अनुसार, गुजरात में पटाखा निर्माण का प्रमुख सीजन गणेशोत्सव से शुरू होकर दीवाली तक चलता है।
इसी अवधि में अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट के थोक व्यापारी स्थानीय फैक्ट्रियों को बड़े पैमाने पर ऑर्डर देते हैं, जिसके आधार पर उत्पादन किया जाता है।
पंचमहल सहित कई जिलों से आते हैं मजदूर
उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, अहमदाबाद और आसपास की अधिकांश फैक्ट्रियों में पंचमहल जिले सहित अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मजदूर काम करने आते हैं। वर्षभर छोटे पटाखों के निर्माण और पैकेजिंग का काम चलता रहता है।
सुरक्षा और नियमन पर उठ रहे सवाल
हालिया फैक्ट्री विस्फोट के बाद यह सवाल फिर उठने लगा है कि—
- क्या सभी इकाइयां वैध लाइसेंस के साथ संचालित हो रही हैं?
- क्या विस्फोटक सामग्री के भंडारण और निर्माण के सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है?
- क्या संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण करते हैं?
- अवैध फैक्ट्रियों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
इन सवालों को लेकर उद्योग और प्रशासन दोनों पर दबाव बढ़ा है।
व्यापारियों की मांग- नियोजित विकास हो
उद्योग से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार स्पष्ट नीति बनाकर लाइसेंस प्रक्रिया सरल करे, सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करवाए और अवैध इकाइयों पर कार्रवाई करे, तो गुजरात भी तमिलनाडु के शिवकाशी की तरह देश का प्रमुख पटाखा उत्पादन केंद्र बन सकता है।
उनका मानना है कि संगठित और सुरक्षित उद्योग विकसित होने से रोजगार बढ़ेगा और दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।
स्थानीय बाजारों में बिकते हैं गुजरात में बने पटाखे
दीवाली के दौरान अहमदाबाद सहित राज्य के कई शहरों में स्थानीय बाजारों और अस्थायी दुकानों पर बड़ी मात्रा में गुजरात में निर्मित पटाखों की बिक्री होती है। इससे हजारों छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को भी मौसमी रोजगार मिलता है।
