ट्रंप का नया विवादित प्रस्ताव, अमेरिका में 1.5 लाख भारतीय ट्रक ड्राइवरों की नौकरी पर मंडराया संकट

Donald Trump New Plan: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रवासी ट्रक ड्राइवरों को लेकर एक नया और विवादित प्रस्ताव पेश किया है। यदि यह योजना लागू होती है, तो अमेरिका में काम कर रहे करीब 1.3 से 1.5 लाख भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवरों, विशेषकर पंजाब और हरियाणा से जुड़े लोगों, की नौकरियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

सेना के पूर्व सैनिकों को मिलेगी प्राथमिकता

पेंसिल्वेनिया में आयोजित ‘मिलिट्री इन्वेस्टमेंट समिट’ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार प्रवासी ट्रक ड्राइवरों की जगह अमेरिकी सेना के सेवानिवृत्त सैनिकों को अवसर देने की योजना बना रही है।

उन्होंने कहा कि भारी वाहन चलाने का अनुभव रखने वाले पूर्व सैनिकों को बिना अतिरिक्त प्रक्रिया के सीधे कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (CDL) उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रवासी ड्राइवरों पर लगाए गंभीर आरोप

अपने संबोधन में ट्रंप ने आरोप लगाया कि कई प्रवासी ट्रक चालक नशे की लत से प्रभावित होते हैं और अंग्रेजी में लिखे सड़क संकेतों को ठीक से नहीं पढ़ पाते, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।

हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में ट्रंप ने कोई आधिकारिक आंकड़े या प्रमाण सार्वजनिक नहीं किए।

करीब दो लाख लाइसेंस रद्द होने का दावा

रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इस वर्ष मार्च में लागू किए गए नए नियमों के तहत लगभग 2 लाख प्रवासी ट्रक ड्राइवरों के कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (CDL) रद्द किए हैं। बताया जा रहा है कि इनमें ऐसे चालक भी शामिल थे जिनके पास पहले अमेरिका में रहने और काम करने के वैध दस्तावेज थे।

भारतीय और पंजाबी समुदाय पर पड़ सकता है बड़ा असर

नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी ट्रकर्स एसोसिएशन (NAPTA) के अनुसार, अमेरिका में वर्तमान में लगभग 1.3 से 1.5 लाख ट्रक ड्राइवर पंजाब और हरियाणा मूल के हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप की यह योजना पूरी तरह लागू होती है, तो हजारों भारतीय परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। भारतीय मूल के ट्रक चालक पहले से ही अनिवार्य अंग्रेजी दक्षता परीक्षा और अन्य कड़े नियमों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में नया प्रस्ताव उनकी चुनौतियां और बढ़ा सकता है।

फिलहाल प्रस्ताव, अंतिम फैसला बाकी

यह प्रस्ताव अभी नीति के रूप में घोषित किया गया है। इसके पूर्ण रूप से लागू होने के लिए संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसलिए इसके अंतिम स्वरूप और प्रभाव पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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