
Donald Trump Generic Drug Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ लागू करने की नई नीति की घोषणा की है। अमेरिका, भारतीय दवा कंपनियों का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, ऐसे में इस फैसले का भारतीय फार्मास्यूटिकल उद्योग पर बड़ा असर पड़ सकता है।
दो साल तक कोई टैरिफ नहीं, फिर 100% और उसके बाद 200%
ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2028 तक अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ (0%) नहीं लगाया जाएगा।
इसके बाद अगस्त 2028 से एक वर्ष के लिए 100% टैरिफ लागू किया जाएगा और उसके बाद यह बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि यह नीति दवा कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लाई जा रही है।
अमेरिकी कंपनियों को भी दी चेतावनी
ट्रंप ने कहा कि यदि दवा कंपनियां निर्धारित समय सीमा के भीतर अमेरिका में अपने उत्पादन संयंत्र और आवश्यक ढांचा विकसित नहीं करती हैं, तो उन्हें भारी शुल्क और अन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि इस नीति का उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के उत्पादन को दोबारा अमेरिका में स्थापित करना है।
भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों पड़ेगा?
भारत को दुनिया की “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता है। भारत से अमेरिका को बड़ी मात्रा में जेनेरिक दवाओं का निर्यात होता है, जिनमें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर, संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित दवाएं शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 2028 से 100% और बाद में 200% टैरिफ लागू होता है, तो भारतीय दवा कंपनियों की लागत और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। साथ ही, अमेरिका में जेनेरिक दवाएं महंगी होने से मरीजों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।
भारतीय कंपनियों के सामने दो बड़े विकल्प
नई नीति लागू होने की स्थिति में भारतीय फार्मा कंपनियों के सामने दो प्रमुख विकल्प होंगे—
- अमेरिका में उत्पादन संयंत्र स्थापित कर स्थानीय स्तर पर निर्माण बढ़ाना।
- या फिर भारी आयात शुल्क का बोझ उठाते हुए अमेरिकी बाजार में अपनी मौजूदगी बनाए रखना।
आने वाले वर्षों में यह नीति भारत-अमेरिका फार्मा व्यापार और वैश्विक दवा आपूर्ति श्रृंखला पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
