
US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने दावा किया है कि होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार 10वें दिन भी हवाई हमले किए। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि किसी अमेरिकी सैनिक को निशाना बनाया गया तो ईरान को इसकी “बहुत बड़ी कीमत” चुकानी पड़ेगी।
ईरानी मीडिया का दावा- 50 से अधिक लोगों की मौत
ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, अमेरिकी हमलों में अब तक 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 517 लोग घायल हुए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में संघर्ष के दौरान 17 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है।
अमेरिका ने किन ठिकानों को बनाया निशाना?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, एयरस्ट्राइक का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका उपयोग कथित तौर पर होरमुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के लिए किया जा रहा था।
अमेरिका का कहना है कि हमलों में निम्नलिखित ठिकानों को निशाना बनाया गया—
- सैन्य कमांड सेंटर
- एयर डिफेंस सिस्टम
- तटीय निगरानी केंद्र
- मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट
- संचार नेटवर्क
वहीं, IRNA के अनुसार तबरीज़, बंदर इमाम खुमैनी, सिरिक, जास्क, कोनारक और चाबहार समेत कई क्षेत्रों में बमबारी हुई है।
ईरान के जवाबी हमलों के दावे
ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के सहयोगी देशों जॉर्डन, कुवैत और बहरीन को भी निशाना बनाया है।
रिपोर्टों के अनुसार, जॉर्डन में हुए एक हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत और एक सैनिक के लापता होने का दावा किया गया है। वहीं, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने तीन ईरानी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
होरमुज़ और लाल सागर में बढ़ा संकट
संघर्ष के चलते होरमुज़ जलडमरूमध्य और लाल सागर में समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है।
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान के तट के पास तेल टैंकरों से जुड़ी सुरक्षा घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें जहाजों में आग लगने और चालक दल के जहाज छोड़ने की घटनाएं शामिल हैं।
इसी बीच, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी लाल सागर में सऊदी अरब से जुड़े समुद्री मार्गों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर के पार
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर आशंकाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक तेल कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
कूटनीतिक प्रयास भी जारी
सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर समाधान की कोशिशें भी जारी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के आंतरिक मंत्री पाकिस्तान के दौरे पर हैं, जहां क्षेत्रीय तनाव कम करने और संभावित मध्यस्थता पर चर्चा हो रही है।
वहीं, अमेरिका ने भी संकेत दिया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए ईरान को गंभीर पहल करनी होगी।
