समुद्र की 700 मीटर गहराई में मिला सोने का विशाल खजाना, जापान के वैज्ञानिकों की ऐतिहासिक खोज

Real Wealth Inside Fool’s Gold: विज्ञान और भूविज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। जिस खनिज को सदियों से ‘फूल्स गोल्ड’ (Fool’s Gold) यानी ‘मूर्खों का सोना’ कहा जाता था, उसी के भीतर वैज्ञानिकों ने असली सोने का विशाल भंडार खोज निकाला है। यह खोज जापान के तट से दूर समुद्र के भीतर स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी क्रेटर में की गई है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस खनिज में सोने की सांद्रता अब तक दर्ज किए गए वैश्विक स्तर के आंकड़ों से कहीं अधिक है। यह खोज भविष्य में दुनिया भर में सोने की नई खदानों की तलाश का तरीका बदल सकती है।

जापान के समुद्र में हुई ऐतिहासिक खोज

यह शोध शिज़ुओका यूनिवर्सिटी, वासेदा यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने किया है। शोध रिपोर्ट प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Scientific Reports में प्रकाशित हुई है।

यह खोज जापान की राजधानी टोक्यो से लगभग 360 किलोमीटर दक्षिण में स्थित हिगाशी-आओगाशिमा कैल्डेरा नामक समुद्री ज्वालामुखी क्षेत्र में हुई है। यह स्थान जापान के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) के भीतर प्रशांत महासागर में लगभग 700 मीटर की गहराई पर स्थित है। वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक रोबोटिक पनडुब्बियों की मदद से समुद्र तल से चट्टानों के नमूने एकत्र किए।

‘फूल्स गोल्ड’ यानी पाइराइट में छिपा था असली सोना

जिस खनिज में सोना मिला है उसका नाम पाइराइट (Pyrite) है। यह आयरन सल्फाइड से बना खनिज होता है, जिसका रंग और चमक सोने जैसी होती है। इसी वजह से इसे लंबे समय से “फूल्स गोल्ड” कहा जाता रहा है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि यह सोना सामान्य कणों के रूप में नहीं, बल्कि पाइराइट के क्रिस्टल ढांचे के भीतर Solid Solution के रूप में मौजूद है। सेकेंडरी आयन मास स्पेक्ट्रोमेट्री (SIMS) तकनीक से जांच करने पर पता चला कि पाइराइट में 1.9 प्रतिशत (वजन के आधार पर) तक वास्तविक सोना मौजूद है, जो बेहद असाधारण सांद्रता मानी जा रही है।

हाइड्रोथर्मल वेंट्स में मिला सबसे अधिक सोना

हिगाशी-आओगाशिमा कैल्डेरा के समुद्र तल पर तीन सक्रिय हाइड्रोथर्मल फील्ड मौजूद हैं, जहां पृथ्वी की सतह के नीचे से अत्यधिक गर्म, खनिजों से भरपूर तरल लगातार निकलता रहता है। इसी प्रक्रिया के दौरान सल्फाइड जमा होते हैं और उनमें सोना समाहित हो जाता है।

वैज्ञानिकों ने वर्ष 2015 से इस क्षेत्र का अध्ययन शुरू किया था। शुरुआती शोध में यहां औसतन 102 पार्ट्स पर मिलियन (PPM) सोना मिला था, जो पहले से ही दुनिया के अन्य समुद्री सोना भंडारों की तुलना में काफी अधिक था।

परमाणु स्तर पर हुई जांच

वैज्ञानिकों ने चट्टानों को बारीक पाउडर बनाकर अत्याधुनिक मास स्पेक्ट्रोमीटर, इलेक्ट्रॉन बीम तकनीक और अल्ट्रा-सेंसिटिव माइक्रो-एनालिटिकल उपकरणों की सहायता से उनका विश्लेषण किया। जांच में पाया गया कि आर्सेनिक, तांबा और सीसे जैसे तत्व पाइराइट की क्रिस्टल संरचना में बदलाव लाते हैं, जिससे सोने के परमाणुओं के लिए जगह बनती है।

भविष्य में सोने की खोज का बदल सकता है तरीका

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में दुनिया भर में छिपे हुए सोने के भंडार तलाशने में क्रांतिकारी साबित हो सकती है। आधुनिक माइक्रो-एनालिटिकल तकनीकों की मदद से अब उन चट्टानों में भी सोना खोजा जा सकेगा, जिन्हें पहले बेकार समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता था। इससे भविष्य में नए और समृद्ध स्वर्ण भंडारों की पहचान करना कहीं अधिक आसान हो सकता है।

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