
Sonam Wangchuk Protest News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद अब ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ के संस्थापक अभिजीत दीपक ने भी अनशन शुरू कर दिया है।
अभिजीत दीपक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें हिरासत में लिया। वहीं, CJP ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
सफदरजंग अस्पताल में भर्ती, सुरक्षा बढ़ाई गई
दिल्ली पुलिस के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस का कहना है कि लंबे समय से अनशन पर रहने के कारण उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी और डॉक्टरों ने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।
अस्पताल के बाहर सुरक्षा के मद्देनज़र रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) सहित अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
जंतर-मंतर को चारों ओर से घेरा गया
पुलिस ने जंतर-मंतर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्रदर्शन स्थल के चारों ओर चार स्तर की बैरिकेडिंग की गई है और प्रदर्शनकारियों से धरना स्थल खाली करने की अपील की जा रही है।
क्या हैं सोनम वांगचुक की मांगें?
रिपोर्ट के अनुसार, सोनम वांगचुक NEET पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन कर रहे थे।
इस आंदोलन को कई विपक्षी नेताओं का समर्थन भी मिला। हाल के दिनों में अरविंद केजरीवाल, डिंपल यादव और पवन खेड़ा सहित कई नेताओं ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया था।
संजय सिंह ने सरकार पर लगाए आरोप
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने बातचीत करने के बजाय बलपूर्वक कार्रवाई की। उन्होंने दावा किया कि सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाया गया और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज के आरोपों से इनकार किया है।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद
अभिजीत दीपक ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। वहीं, पुलिस का कहना है कि उसकी कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई।
फिलहाल, मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। विभिन्न पक्षों के आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
